Jan. 14, 2026
Ateet ka Darwaza/The Red Door
During a trip to Rajasthan with her friends and cousin, Charu stumbled upon an old, dilapidated palace hidden from the eyes of time. Inside a massive portrait of a queen dominated the central hall, her features eerily resembling Charu's. Charu sensed a deep connection to the palace-one that seemed to belong to another life. But nothing could have prepared her for the truth waiting behind the Red Door-a destiny that refused to remain forgotten.
Written and Narrated by: Manoshi
1
00:00:01,200 --> 00:00:06,040
सर्वप्रथम मेरी सारी श्रोताओं को
नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं।
2
00:00:06,640 --> 00:00:10,880
मेरी ये कामना है कि ये वर्ष आप
सब के लिए मंगलमय हो।
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00:00:12,280 --> 00:00:15,760
कुछ किस्से, कुछ आपबीती में आप सब
का स्वागत है।
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00:00:16,480 --> 00:00:22,480
मैं हूँ मानुषी आपकी होस्ट।
और इस स्टोरी पॉडकास्ट की वाचक इस
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00:00:22,480 --> 00:00:26,120
नए साल की शुरुआत मैं एक अलग
तरीके कहानी से कर रही हूँ
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00:00:26,800 --> 00:00:30,280
दोस्तों, आपको याद होगा सीज़न 1
की दसवीं कहानी।
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00:00:30,280 --> 00:00:34,520
कोहरा सुनकर कई श्रोताओं ने मुझसे
अपनी आपबीती साझा की थी।
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00:00:35,240 --> 00:00:38,720
दो चुनिंदा कहानियों में से एक
भ्रम के उस पार।
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00:00:38,760 --> 00:00:41,240
मैं बारहवीं एपिसोड में पेश कर
चुकी हूँ।
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00:00:41,920 --> 00:00:47,000
आज सुनिए दूसरी चुनी कहानी जिसे
भेजा है असम से हमारी एक श्रोता
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00:00:47,000 --> 00:00:52,120
ने, क्योंकि ये कहानी उनकी आपबीती
है और उनके वर्तमान जीवन से भी
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00:00:52,120 --> 00:00:55,600
संबंध रखती है।
इसलिए उनके गोपनीयता के अनुरोध का
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00:00:55,600 --> 00:00:58,800
सम्मान करते हुए।
मैंने कहानी के छात्रों के नाम
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00:00:58,800 --> 00:01:02,560
काल्पनिक रखे हैं।
प्रस्तुत कहने की घटना उनके साथ
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00:01:02,560 --> 00:01:07,000
करीब 8 साल पहले घटित हुई थी जब
वह अपने मित्र मंडली के साथ
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00:01:07,000 --> 00:01:13,240
राजस्थान भ्रमण बढ़ गई थी।
आइए सुनते हैं आज की कहानी जिसका
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शीर्षक है अतीत का दरवाजा।
अरे उठ भी जा चारु और कितना
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00:01:20,600 --> 00:01:25,160
सोयेगी?
कज़िन सोनल के झकझोरने पर चारु
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00:01:25,160 --> 00:01:31,120
आंख मलते हुए उठ बैठी।
वो आज गए गए हम राजस्थान।
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00:01:32,520 --> 00:01:34,760
अलवर।
तो बहुत पहले ही क्रॉस कर लिया।
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00:01:34,800 --> 00:01:36,840
बस अब 1 घंटे में जयपुर भी पहुँच
जाएंगे।
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00:01:38,400 --> 00:01:42,160
तो इतनी जल्दी क्यों उठा दिया?
मुझे सोनल थोड़ा और सोने दे।
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00:01:43,640 --> 00:01:49,760
चारू अभी भी दर्द है क्या?
सोनल ने चिंतित होकर पूछा, नहीं,
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00:01:49,760 --> 00:01:52,520
नहीं मैं ठीक हूँ, बिलकुल डर नहीं
है।
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00:01:53,600 --> 00:02:00,200
अरे ये तो उठ जाइए, राजकुमारी जी
बाहर देखिए कितना प्यारा मौसम है।
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00:02:01,120 --> 00:02:05,520
सोनल के ऐसा कहने पर चारो ने
खिड़की का कांच नीचे किया।
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00:02:06,120 --> 00:02:10,560
बाहर से आती मिट्टी की सूंधी महक
उसे भीतर तक प्रफुल्लित कर गई।
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00:02:11,240 --> 00:02:13,360
शायद कुछ देर पहले ही बारिश हुई
थी।
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00:02:13,920 --> 00:02:18,680
मिट्टी भी खिली थी।
वैसे था तो ये सितंबर का महिना पर
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00:02:18,680 --> 00:02:23,080
इस साल गर्मी बहुत पड़ी थी इसलिए
बेचारी प्रकृति स्वयं ही अपना
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00:02:23,080 --> 00:02:27,960
समाधान कर रही थी।
चारों अपनी मौसेरी बहन सोनल के
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00:02:27,960 --> 00:02:33,360
साथ असम में एक एनजी ओह जलाती थी।
साथ ही दोनों बहने शौकिया तौर पर।
33
00:02:33,640 --> 00:02:38,600
थिएटर और सिंगिंग शोज भी करती थी।
प्रति वर्ष अगस्त सितंबर में उनकी
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00:02:38,600 --> 00:02:42,560
थिएटर कंपनी के नाटकों का मंचन
विभिन्न शहरों में होता था।
35
00:02:43,080 --> 00:02:48,000
इस वर्ष वह दिल्ली में था।
3 दिन तीन ऑडिटोरियम में नाटक पेश
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00:02:48,000 --> 00:02:53,240
कर वे सब काफी थक गए थे।
इसलिए तरो ताजा होने के लिए नाटक
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00:02:53,240 --> 00:02:55,960
मंडली ने राजस्थान टूर का
कार्यक्रम बनाया।
38
00:02:56,880 --> 00:02:59,560
क्योंकि घर वापसी की फ्लाइट 2 दिन
बाद थी।
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00:02:59,960 --> 00:03:04,080
इसलिए लंबा चौरा प्रोग्राम ना
बनाकर सिर्फ जयपुर और जोधपुर
40
00:03:04,080 --> 00:03:08,160
घूमने का प्लान बनाया गया।
और हाँ, भरपूर शॉपिंग भी तो करनी
41
00:03:08,160 --> 00:03:12,040
थी।
चारु को बचपन से ही एक अजीब
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00:03:12,040 --> 00:03:16,320
बिमारी थी।
उसे पेट के बाईं तरफ तीव्र दर्द
43
00:03:16,320 --> 00:03:21,520
होता था जो कुछ देर रहता फिर बिना
किसी दवा या इलाज के अपने आप ठीक
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00:03:21,520 --> 00:03:24,400
हो जाता।
उसने कई नामी गिरामी डॉक्टर
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00:03:24,400 --> 00:03:26,880
दिखाएं।
मुंबई दिल्ली के बड़े अस्पतालों
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00:03:26,880 --> 00:03:29,560
में एमआरआइ अल्ट्रासाउंड स्कैन सब
करवाया।
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00:03:30,080 --> 00:03:33,600
पर सारे रिपोर्ट्स ठीक आए।
कहीं कोई बिमारी नहीं थी।
48
00:03:34,200 --> 00:03:38,280
टूर पर निकलने से पहले भी उसे
दर्द हुआ था और इसलिए वह पूरे
49
00:03:38,280 --> 00:03:42,200
रस्ते भर सोती रही।
वहीं डॉक्टर्स ने इसे फैंटम पेन
50
00:03:42,200 --> 00:03:46,320
जैसा सिंड्रोम बताया पर असली वजह
कोई बता नहीं पाया।
51
00:03:47,440 --> 00:03:51,760
बाहर की मौसम का आनंद लेती हुई।
चारु को एक अजीब सी अनुभूति हो
52
00:03:51,760 --> 00:03:54,880
रही थी।
हालांकि ये उसकी पहली राजस्थान
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00:03:54,880 --> 00:03:58,160
यात्रा थी।
पर न जाने क्यों उसे इस जगह से
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00:03:58,160 --> 00:04:02,960
लगाव एक तरह का अपनापन महसूस हो
रहा था मानो वह यहाँ बहुत बार आ
55
00:04:02,960 --> 00:04:07,200
चुकी हो।
करीब 40 मिनट बाद वह जयपुर में
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00:04:07,200 --> 00:04:11,040
प्रवेश कर गए।
सबका भूख के मारे बुरा हाल था।
57
00:04:11,480 --> 00:04:15,240
दिल्ली से निकलने के बाद सिवाय
चाय स्नेक्स के किसी ने कुछ नहीं
58
00:04:15,240 --> 00:04:18,399
खाया था।
गाड़ी रोककर एक स्थानीय व्यक्ति
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00:04:18,399 --> 00:04:22,440
से जब उन्होंने अच्छे रेस्टोरेंट
का पता पूछा तो उसने अपनी बोली
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00:04:22,440 --> 00:04:26,560
में जवाब दिया किसी को कुछ समझ
नहीं आया।
61
00:04:26,640 --> 00:04:31,240
पर चारों आश्चर्य रूप से सब समझ
गई और उसने उस व्यक्ति को उसी की
62
00:04:31,240 --> 00:04:35,800
भाषा में धन्यवाद भी दिया।
तुने ये भाषा कब सीखी?
63
00:04:36,600 --> 00:04:41,600
सोनल ने पूछा तो चारों को भी झटका
लगा कि ये उसने कैसे किया?
64
00:04:42,200 --> 00:04:46,160
कहाँ वो असम की लड़की जिसने हिंदी
भी मुश्किल से सीखी?
65
00:04:46,400 --> 00:04:51,320
और कहाँ ये राजस्थान की स्थानीय
भाषा उसे अपनी भावनाओं खुद समझ
66
00:04:51,320 --> 00:04:54,360
नहीं आ रही थी।
सोनम को क्या बताती?
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00:04:55,240 --> 00:05:00,120
अरे बस मैंने अंदाजा लगाया
रेस्टोरेंट वासी है जल्दी चलो
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00:05:00,120 --> 00:05:05,640
मुझे बहुत भूख लगी है।
ऐसा कहकर उसने बात को टाल दिया।
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00:05:05,720 --> 00:05:10,080
पेट पूजा कर उन्होंने पहले जंतर
मंत्र देखा फिर हवा महल की ओर रुख
70
00:05:10,080 --> 00:05:14,040
किया।
वहाँ पहुंचते ही चारों को फिर से
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00:05:14,040 --> 00:05:17,600
वही दर्द उठा और वह बुरी तरह
चटपटाने लगी।
72
00:05:18,280 --> 00:05:22,240
उसके दोस्तों ने किसी तरह उसे एक
पेड़ के छांव में बैठाया।
73
00:05:22,320 --> 00:05:26,160
और चाय पानी बेचने वाली एक औरत से
डॉक्टर का पता पूछा।
74
00:05:27,200 --> 00:05:31,600
जैसे ही उस औरत की नजर चारू पर
पड़ी उसके मुँह से निकला।
75
00:05:32,600 --> 00:05:38,240
अरे ई छोड़ी तो अपने पुराने महरनी
रानी सज ऐसे दिखे हैं।
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00:05:39,560 --> 00:05:43,680
किसी ने उस औरत की बात में कोई
दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि वह
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00:05:43,680 --> 00:05:46,080
सब चारु की हालत को लेकर परेशान
थे।
78
00:05:46,760 --> 00:05:51,920
पर इतने दर्द में भी चारु को यह
सुनकर थोड़ा कौतूहल हुआ और जैसे
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00:05:51,920 --> 00:05:57,320
ही दर्द कम हुआ उसने उस औरत से
उसकी कही बात का मतलब पूछा जवाब
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00:05:57,320 --> 00:06:00,720
चाहिए।
तो भंवर विलासरा पुराने किले में
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00:06:00,720 --> 00:06:06,160
जा चारों थोड़ी सी ठीक हुई।
सब जल्दी से गाड़ी में बैठे और
82
00:06:06,160 --> 00:06:10,760
हवा महल की तरफ निकल पड़े।
चारों ने पीछे पलट कर उस औरत की
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00:06:10,760 --> 00:06:16,000
तरफ देखा तो उसने एक रहस्यमय
मुस्कराहट के साथ अपने हाथ सिर के
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00:06:16,000 --> 00:06:18,920
ऊपर ले जाकर।
को प्रणाम किया।
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00:06:20,160 --> 00:06:25,440
हवा महल देखने के बाद सब ने बाजार
का रुख किया, क्योंकि शॉपिंग सब
86
00:06:25,440 --> 00:06:30,920
की लिस्ट में पहले नंबर पर थी।
शाम के 6:00 बज चूके थे और अगले
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00:06:30,920 --> 00:06:35,280
दिन दिल्ली के लिए निकलना था।
इसलिए तय हुआ की यात्रा जयपुर तक
88
00:06:35,280 --> 00:06:39,080
ही रखी जाए।
ये सुनकर चारू का मुँह उतर गया।
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00:06:39,680 --> 00:06:44,480
उसे तो भंवर विलास जाना था उस औरत
की कही बात पुख्ता करने के लिए
90
00:06:45,920 --> 00:06:49,280
राजस्थान आकर कोई किला महल नहीं
देखा तो क्या घूमे?
91
00:06:49,920 --> 00:06:53,240
यहाँ से एक डेढ़ घंटे की दूरी पर
भंवर विलास है।
92
00:06:53,520 --> 00:06:58,720
चलो ना वहाँ जलते हैं।
चारू के इस सुझाव पर लोग दो
93
00:06:58,720 --> 00:07:02,400
ग्रुप्स में बैठ गए।
कुछ जाना चाहते थे कुछ नहीं।
94
00:07:03,120 --> 00:07:08,520
अंततः सबको उसके जिद के आगे झुकना
पड़ा और गाड़ी भवर विलास की ओर चल
95
00:07:08,520 --> 00:07:13,240
पड़ी।
अरे चारू, मैं आप पर डायरेक्शन
96
00:07:13,240 --> 00:07:17,840
सीट करना।
किधर जाना है पता तो चले गाड़ी
97
00:07:17,840 --> 00:07:24,160
चला रहे अमर ने पूछा तो चारु पूरे
आत्मबिस्वास से बोली, आरे तू चला?
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00:07:24,160 --> 00:07:29,800
मैं बताती हूँ कहा जाना है पहले
पांच छे किलोमीटर बिल को सीधा चल
99
00:07:30,440 --> 00:07:36,520
फिर दुर्गा मंदिर से बाय लेना।
इस तरह बिना मैप देखे चारों ने जब
100
00:07:36,520 --> 00:07:41,520
सफलता पूर्वक सबको भवर विलास
पहुंचा दिया तो दूसरों से ज्यादा
101
00:07:41,520 --> 00:07:46,400
आश्चर्य उसे खुद हुआ क्योंकि उसने
इस महल का नाम ही पहली बार सुना
102
00:07:46,400 --> 00:07:49,040
था।
फिर लोकेशन जानना तो दूर की बात
103
00:07:49,040 --> 00:07:53,400
थी वहाँ पहुँचकर महल की दयनीय
हालत देख कर।
104
00:07:53,600 --> 00:07:58,360
सबको बड़ा अफसोस हुआ।
चरवाहों और गड़रियों से घिरे उस
105
00:07:58,360 --> 00:08:04,080
छोटी सी जगह पर वह विशाल उजाड़
महल अपने गौरव हीन अतीत का परिचय
106
00:08:04,080 --> 00:08:07,640
दे रहा था।
ऊपर से स्थानीय लोग इन्हें अजीब
107
00:08:07,640 --> 00:08:10,520
नजरों से घूर रहे थे, खासकर चारू
को।
108
00:08:11,240 --> 00:08:15,600
एक बूढ़ी दादी तो राणे सा राणे सा
कहते हुए उसके पैरों पर गिर पड़ी
109
00:08:16,960 --> 00:08:19,040
ये सब।
इस तरह का अजीब बर्ताव क्यों कर
110
00:08:19,040 --> 00:08:23,960
रहे है?
सोनल बोली, हम्म ये महल भी बहुत
111
00:08:23,960 --> 00:08:28,440
पुराना लग रहा है, उजाड़ भी है,
लगता है सरकार इसकी देखरेख नहीं
112
00:08:28,440 --> 00:08:30,520
करती।
अमर बोला।
113
00:08:31,800 --> 00:08:35,240
गाइस तुम लोग आगे चलो, मैं ज़रा
बाथरूम हो कर आती।
114
00:08:35,240 --> 00:08:40,960
हूँ नहीं, चारु सब साथ चलेंगे तू
हो कर आ, हम यहीं पर हैं।
115
00:08:42,600 --> 00:08:48,840
सोनल की इस बात पर सभी एकमत हुए।
चारों को महल के आसपास कहीं
116
00:08:48,840 --> 00:08:53,040
बाथरूम नहीं मिला।
तभी उसे दूर दिवार पर एक लाल लोहे
117
00:08:53,040 --> 00:08:56,920
का दरवाजा दिखा।
बाथरूम समझकर दरवाजा खोलकर वो
118
00:08:56,920 --> 00:09:01,320
अंदर गई तो वो चौंक गई।
अंदर अट्ठारहवीं शताब्दी का माहौल
119
00:09:01,320 --> 00:09:05,600
था, कोई महफिल सजी हुई थी, गाना
बजाना चल रहा था।
120
00:09:05,960 --> 00:09:08,600
सबने राज़ परिवारों जैसे कपड़े
पहने हुए थे।
121
00:09:09,400 --> 00:09:16,040
वो डरते डरते आगे गयी और किसी से
पूछा ये क्या चल रहा है पर उस
122
00:09:16,040 --> 00:09:20,600
व्यक्ति ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने एक दो और लोगों से पूछा पर
123
00:09:20,600 --> 00:09:24,360
सब संगीत का आनंद ले रहे थे।
ऐसा लग रहा था मानो कोई उसे देख
124
00:09:24,360 --> 00:09:29,920
ही नहीं पा रहा था।
तभी उसकी नजर सिंहासन पर बैठे
125
00:09:30,200 --> 00:09:32,080
पीली पगड़ी बांधे व्यक्ति पर
पड़ी।
126
00:09:32,720 --> 00:09:36,440
पोषण के व्यवहार से वह कोई राजा
या राजकुमार लग रहा था।
127
00:09:37,160 --> 00:09:41,640
चारु को वह बहुत पहचाना सा लगा
मानो अभी हाल ही में कभी मिली थी।
128
00:09:42,480 --> 00:09:46,120
अचानक सब उठ खड़े हुए कोई आ रहा
था।
129
00:09:46,240 --> 00:09:50,680
संगीत रोक दिया गया।
उसने देखा दूर से रात सी पोशाक
130
00:09:50,680 --> 00:09:54,800
पहने और लाल रंग की पगड़ी बांधे
एक युवक चला आ रहा था।
131
00:09:55,400 --> 00:09:59,200
शक्ल सूरत में वह बिल्कुल सिंहासन
पर बैठे व्यक्ति का हमशक्ल था।
132
00:10:00,800 --> 00:10:03,960
उसे समझते देर नहीं लगी कि ये
दोनों जुड़वा थे।
133
00:10:05,000 --> 00:10:09,480
लाल पगड़ी वाला युवक चारो के
सामने से गुजरा तो उसने एक जलक
134
00:10:09,480 --> 00:10:14,040
चारू की और ताका नजरे मिलते ही
चारो का चेहरा सफ़ेद बढ़ गया।
135
00:10:14,640 --> 00:10:21,800
ये ये तो वो स्वयं थी यही आँखे तो
वो रोज़ आईने में देखती थी तो तो
136
00:10:21,800 --> 00:10:24,280
क्या मेरे इस महल से कोई पिछले
जनम का रिश्ता है?
137
00:10:25,400 --> 00:10:29,040
अभी वह ऐसा सोच ही रही थी कि वहाँ
कोलहल मच गया।
138
00:10:29,560 --> 00:10:32,960
आए हुए युवक ने पहले वाले युवक पर
आक्रमण कर दिया था।
139
00:10:33,440 --> 00:10:35,640
दोनों के बीच तलवार बाजी हो रही
थी।
140
00:10:36,080 --> 00:10:39,720
फिर देखते ही देखते लाल पगड़ी
वाले ने पीली पगड़ी वाले को मौत
141
00:10:39,720 --> 00:10:43,440
के घाट उतार दिया।
पर इस लड़ाई में वह भी आहत हुआ
142
00:10:43,440 --> 00:10:46,440
था।
उसके पेट के बाईं तरफ से खून निकल
143
00:10:46,440 --> 00:10:50,000
रहा था।
ये देख चारों के पेट में तेज दर्द
144
00:10:50,000 --> 00:10:53,120
उठा और वह किसी तरह लड़खड़ाते हुए
बाहर आई।
145
00:10:53,520 --> 00:10:57,800
बाहर आते ही उसका दर्द गायब हो
गया और साथ ही वह दरवाजा भी।
146
00:10:59,000 --> 00:11:03,320
चारों ने अभी जो सब देखा था, वह
उसके अतीत की झलक थी।
147
00:11:03,720 --> 00:11:08,080
जिसने उसे अपने जुड़वा भाई की
हत्या की थी और तलवार के घाव का
148
00:11:08,080 --> 00:11:13,600
दर्द इस जनम में भी भुगत रही थी।
घबराई और सहमी जब वह दोस्तों के
149
00:11:13,600 --> 00:11:18,400
पास गई तो पाया वे सब अचंभित होकर
एक बड़े से पोर्ट्रेट को देख रहे
150
00:11:18,400 --> 00:11:21,680
थे, जिसमे बीच में राजमाता बैठी
हुई थी।
151
00:11:21,920 --> 00:11:26,760
और दोनों तरफ से जुड़वा भाई थे।
चारू देख ये तो बिल्कुल तेरी
152
00:11:26,760 --> 00:11:31,480
हमशक्ल है।
सोनल बोली पर चारू को पता था।
153
00:11:31,720 --> 00:11:35,880
वो राजमाता की नहीं बल्कि लाल
पगड़ी वाले का पुनर्जन्म थी।
154
00:11:36,600 --> 00:11:40,000
वहाँ के स्थानीय लोगों से उन्हें
राजवंश की कहानी पता चली।
155
00:11:40,760 --> 00:11:45,400
उस वंश में हर पीढ़ी में जुड़वा
हुए थे और हर बार सिर्फ एक ही
156
00:11:45,400 --> 00:11:51,520
बचना था एक जनम में जो मारता था
अगले जनम में वो खुद मारा जाता
157
00:11:51,520 --> 00:11:58,320
था, शापित वंश था वो घर वापस
पहुंचते ही उसने अपनी माँ को पूछ
158
00:11:58,320 --> 00:12:01,800
पूछ कर पागल कर दिया।
कि कहीं उसके कोई जुड़वा भाई या
159
00:12:01,800 --> 00:12:05,640
बहन तो नहीं थे?
उसे पूरा यकीन था कि जिसे उसने
160
00:12:05,640 --> 00:12:11,280
मारा वह इस जन्म में उसको मारेगा।
दिन रात यही सब सोचकर उसे
161
00:12:11,280 --> 00:12:14,920
डिप्रेशन हो गया और उसका
स्वास्थ्य भी बिगड़ता गया।
162
00:12:15,840 --> 00:12:19,400
उसी दौरान उसके मौसा जी की हार्ट
अटैक से मृत्यु हो गई।
163
00:12:19,960 --> 00:12:25,040
मौसी हॉउस वाइफ थी और सोनल भी
एनजीओ का काम करती थी, इसलिए वह
164
00:12:25,040 --> 00:12:29,760
आर्थिक तंगी में आ गए।
1 दिन उसने अपने माता पिता को
165
00:12:29,800 --> 00:12:34,840
किसी गंभीर विषय पर आलोचना करते
हुए सुना और पूरी बात सुनकर उसके
166
00:12:34,840 --> 00:12:39,720
पैरों तले जमीन खिसक गई।
सोनल उसकी सग्गी बड़ी बहन थी।
167
00:12:40,720 --> 00:12:44,240
उसके मौसा मौसी शादी के कई साल
बाद तक बे औलाद थे।
168
00:12:44,760 --> 00:12:48,600
इसलिए चारु के जन्म लेते ही
उन्होंने सोनल को आधिकारिक रूप से
169
00:12:48,600 --> 00:12:52,240
गोद ले लिया था।
उसके माता पिता यही विवेचना कर
170
00:12:52,240 --> 00:12:57,640
रहे थे की मौसा की मृत्यु के बाद
किस तरह सोनल की मदद करे क्योंकि
171
00:12:57,640 --> 00:13:02,520
आखिर थी तो उन्हीं की संतान।
इस खुलासे से चारों के अंदर की
172
00:13:02,520 --> 00:13:06,800
सारी दुविधाएं मिट गयी और उसे
जन्मो के अभिशाप को खत्म करने का
173
00:13:06,800 --> 00:13:10,720
समाधान मिल गया।
एक हफ्ते के अंदर ही उसने पिता से
174
00:13:10,720 --> 00:13:14,240
विल बनवाई और बड़ा हिस्सा सोनल के
नाम करवाया।
175
00:13:15,040 --> 00:13:18,800
दोनों बहनों में कजिन के तौर पर
हमेशा से ही अपार स्नेह था।
176
00:13:19,640 --> 00:13:23,280
जो अब वास्तविकता जानने के बाद और
भी प्रगाढ़ हो गया था।
177
00:13:24,040 --> 00:13:28,080
आज 7 साल बाद दोनों पार्टनर्स के
रूप में न सिर्फ एनजी ओह चला रही
178
00:13:28,080 --> 00:13:33,080
थी बल्कि अपने पिता का बिज़नेस भी
सफलतापूर्वक संभाल रही थी।
179
00:13:37,000 --> 00:13:42,160
दोस्तों, ये थी चारों की आपीती
आशा करती हूँ आज की ये कहानी आप
180
00:13:42,160 --> 00:13:47,560
सबको पसंद आई होगी और ये घटना इस
सिद्धांत को बल देती है की टाइम
181
00:13:47,560 --> 00:13:52,840
इस नॉट लिनियर पर ये सब हम
मनुष्यों की समझ से परे है
182
00:13:53,160 --> 00:13:56,680
क्योंकि हमारा मस्तिष्क अभी तक उस
आयाम में पहुंचा ही नहीं।
183
00:13:57,600 --> 00:14:01,240
पर इस तरह की मैट्रिक्स में गलीच
वाली घटनाएं हमें ये सोचने पर
184
00:14:01,240 --> 00:14:05,640
मजबूर करती हैं कि हम जो देख रहे
हैं क्या वो सच है?
185
00:14:07,000 --> 00:14:10,680
मुझे यकीन है आप में से कईयों ने
ऐसे अनुभव किए हैं।
186
00:14:11,080 --> 00:14:15,720
अगर आप चाहे अपनी आपबीती को शेयर
करना तो प्लीज़ हमें ईमेल करें।
187
00:14:16,400 --> 00:14:18,040
लिंक डिस्क्रिप्षन में हैं।
00:00:01,200 --> 00:00:06,040
सर्वप्रथम मेरी सारी श्रोताओं को
नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएं।
2
00:00:06,640 --> 00:00:10,880
मेरी ये कामना है कि ये वर्ष आप
सब के लिए मंगलमय हो।
3
00:00:12,280 --> 00:00:15,760
कुछ किस्से, कुछ आपबीती में आप सब
का स्वागत है।
4
00:00:16,480 --> 00:00:22,480
मैं हूँ मानुषी आपकी होस्ट।
और इस स्टोरी पॉडकास्ट की वाचक इस
5
00:00:22,480 --> 00:00:26,120
नए साल की शुरुआत मैं एक अलग
तरीके कहानी से कर रही हूँ
6
00:00:26,800 --> 00:00:30,280
दोस्तों, आपको याद होगा सीज़न 1
की दसवीं कहानी।
7
00:00:30,280 --> 00:00:34,520
कोहरा सुनकर कई श्रोताओं ने मुझसे
अपनी आपबीती साझा की थी।
8
00:00:35,240 --> 00:00:38,720
दो चुनिंदा कहानियों में से एक
भ्रम के उस पार।
9
00:00:38,760 --> 00:00:41,240
मैं बारहवीं एपिसोड में पेश कर
चुकी हूँ।
10
00:00:41,920 --> 00:00:47,000
आज सुनिए दूसरी चुनी कहानी जिसे
भेजा है असम से हमारी एक श्रोता
11
00:00:47,000 --> 00:00:52,120
ने, क्योंकि ये कहानी उनकी आपबीती
है और उनके वर्तमान जीवन से भी
12
00:00:52,120 --> 00:00:55,600
संबंध रखती है।
इसलिए उनके गोपनीयता के अनुरोध का
13
00:00:55,600 --> 00:00:58,800
सम्मान करते हुए।
मैंने कहानी के छात्रों के नाम
14
00:00:58,800 --> 00:01:02,560
काल्पनिक रखे हैं।
प्रस्तुत कहने की घटना उनके साथ
15
00:01:02,560 --> 00:01:07,000
करीब 8 साल पहले घटित हुई थी जब
वह अपने मित्र मंडली के साथ
16
00:01:07,000 --> 00:01:13,240
राजस्थान भ्रमण बढ़ गई थी।
आइए सुनते हैं आज की कहानी जिसका
17
00:01:13,240 --> 00:01:20,600
शीर्षक है अतीत का दरवाजा।
अरे उठ भी जा चारु और कितना
18
00:01:20,600 --> 00:01:25,160
सोयेगी?
कज़िन सोनल के झकझोरने पर चारु
19
00:01:25,160 --> 00:01:31,120
आंख मलते हुए उठ बैठी।
वो आज गए गए हम राजस्थान।
20
00:01:32,520 --> 00:01:34,760
अलवर।
तो बहुत पहले ही क्रॉस कर लिया।
21
00:01:34,800 --> 00:01:36,840
बस अब 1 घंटे में जयपुर भी पहुँच
जाएंगे।
22
00:01:38,400 --> 00:01:42,160
तो इतनी जल्दी क्यों उठा दिया?
मुझे सोनल थोड़ा और सोने दे।
23
00:01:43,640 --> 00:01:49,760
चारू अभी भी दर्द है क्या?
सोनल ने चिंतित होकर पूछा, नहीं,
24
00:01:49,760 --> 00:01:52,520
नहीं मैं ठीक हूँ, बिलकुल डर नहीं
है।
25
00:01:53,600 --> 00:02:00,200
अरे ये तो उठ जाइए, राजकुमारी जी
बाहर देखिए कितना प्यारा मौसम है।
26
00:02:01,120 --> 00:02:05,520
सोनल के ऐसा कहने पर चारो ने
खिड़की का कांच नीचे किया।
27
00:02:06,120 --> 00:02:10,560
बाहर से आती मिट्टी की सूंधी महक
उसे भीतर तक प्रफुल्लित कर गई।
28
00:02:11,240 --> 00:02:13,360
शायद कुछ देर पहले ही बारिश हुई
थी।
29
00:02:13,920 --> 00:02:18,680
मिट्टी भी खिली थी।
वैसे था तो ये सितंबर का महिना पर
30
00:02:18,680 --> 00:02:23,080
इस साल गर्मी बहुत पड़ी थी इसलिए
बेचारी प्रकृति स्वयं ही अपना
31
00:02:23,080 --> 00:02:27,960
समाधान कर रही थी।
चारों अपनी मौसेरी बहन सोनल के
32
00:02:27,960 --> 00:02:33,360
साथ असम में एक एनजी ओह जलाती थी।
साथ ही दोनों बहने शौकिया तौर पर।
33
00:02:33,640 --> 00:02:38,600
थिएटर और सिंगिंग शोज भी करती थी।
प्रति वर्ष अगस्त सितंबर में उनकी
34
00:02:38,600 --> 00:02:42,560
थिएटर कंपनी के नाटकों का मंचन
विभिन्न शहरों में होता था।
35
00:02:43,080 --> 00:02:48,000
इस वर्ष वह दिल्ली में था।
3 दिन तीन ऑडिटोरियम में नाटक पेश
36
00:02:48,000 --> 00:02:53,240
कर वे सब काफी थक गए थे।
इसलिए तरो ताजा होने के लिए नाटक
37
00:02:53,240 --> 00:02:55,960
मंडली ने राजस्थान टूर का
कार्यक्रम बनाया।
38
00:02:56,880 --> 00:02:59,560
क्योंकि घर वापसी की फ्लाइट 2 दिन
बाद थी।
39
00:02:59,960 --> 00:03:04,080
इसलिए लंबा चौरा प्रोग्राम ना
बनाकर सिर्फ जयपुर और जोधपुर
40
00:03:04,080 --> 00:03:08,160
घूमने का प्लान बनाया गया।
और हाँ, भरपूर शॉपिंग भी तो करनी
41
00:03:08,160 --> 00:03:12,040
थी।
चारु को बचपन से ही एक अजीब
42
00:03:12,040 --> 00:03:16,320
बिमारी थी।
उसे पेट के बाईं तरफ तीव्र दर्द
43
00:03:16,320 --> 00:03:21,520
होता था जो कुछ देर रहता फिर बिना
किसी दवा या इलाज के अपने आप ठीक
44
00:03:21,520 --> 00:03:24,400
हो जाता।
उसने कई नामी गिरामी डॉक्टर
45
00:03:24,400 --> 00:03:26,880
दिखाएं।
मुंबई दिल्ली के बड़े अस्पतालों
46
00:03:26,880 --> 00:03:29,560
में एमआरआइ अल्ट्रासाउंड स्कैन सब
करवाया।
47
00:03:30,080 --> 00:03:33,600
पर सारे रिपोर्ट्स ठीक आए।
कहीं कोई बिमारी नहीं थी।
48
00:03:34,200 --> 00:03:38,280
टूर पर निकलने से पहले भी उसे
दर्द हुआ था और इसलिए वह पूरे
49
00:03:38,280 --> 00:03:42,200
रस्ते भर सोती रही।
वहीं डॉक्टर्स ने इसे फैंटम पेन
50
00:03:42,200 --> 00:03:46,320
जैसा सिंड्रोम बताया पर असली वजह
कोई बता नहीं पाया।
51
00:03:47,440 --> 00:03:51,760
बाहर की मौसम का आनंद लेती हुई।
चारु को एक अजीब सी अनुभूति हो
52
00:03:51,760 --> 00:03:54,880
रही थी।
हालांकि ये उसकी पहली राजस्थान
53
00:03:54,880 --> 00:03:58,160
यात्रा थी।
पर न जाने क्यों उसे इस जगह से
54
00:03:58,160 --> 00:04:02,960
लगाव एक तरह का अपनापन महसूस हो
रहा था मानो वह यहाँ बहुत बार आ
55
00:04:02,960 --> 00:04:07,200
चुकी हो।
करीब 40 मिनट बाद वह जयपुर में
56
00:04:07,200 --> 00:04:11,040
प्रवेश कर गए।
सबका भूख के मारे बुरा हाल था।
57
00:04:11,480 --> 00:04:15,240
दिल्ली से निकलने के बाद सिवाय
चाय स्नेक्स के किसी ने कुछ नहीं
58
00:04:15,240 --> 00:04:18,399
खाया था।
गाड़ी रोककर एक स्थानीय व्यक्ति
59
00:04:18,399 --> 00:04:22,440
से जब उन्होंने अच्छे रेस्टोरेंट
का पता पूछा तो उसने अपनी बोली
60
00:04:22,440 --> 00:04:26,560
में जवाब दिया किसी को कुछ समझ
नहीं आया।
61
00:04:26,640 --> 00:04:31,240
पर चारों आश्चर्य रूप से सब समझ
गई और उसने उस व्यक्ति को उसी की
62
00:04:31,240 --> 00:04:35,800
भाषा में धन्यवाद भी दिया।
तुने ये भाषा कब सीखी?
63
00:04:36,600 --> 00:04:41,600
सोनल ने पूछा तो चारों को भी झटका
लगा कि ये उसने कैसे किया?
64
00:04:42,200 --> 00:04:46,160
कहाँ वो असम की लड़की जिसने हिंदी
भी मुश्किल से सीखी?
65
00:04:46,400 --> 00:04:51,320
और कहाँ ये राजस्थान की स्थानीय
भाषा उसे अपनी भावनाओं खुद समझ
66
00:04:51,320 --> 00:04:54,360
नहीं आ रही थी।
सोनम को क्या बताती?
67
00:04:55,240 --> 00:05:00,120
अरे बस मैंने अंदाजा लगाया
रेस्टोरेंट वासी है जल्दी चलो
68
00:05:00,120 --> 00:05:05,640
मुझे बहुत भूख लगी है।
ऐसा कहकर उसने बात को टाल दिया।
69
00:05:05,720 --> 00:05:10,080
पेट पूजा कर उन्होंने पहले जंतर
मंत्र देखा फिर हवा महल की ओर रुख
70
00:05:10,080 --> 00:05:14,040
किया।
वहाँ पहुंचते ही चारों को फिर से
71
00:05:14,040 --> 00:05:17,600
वही दर्द उठा और वह बुरी तरह
चटपटाने लगी।
72
00:05:18,280 --> 00:05:22,240
उसके दोस्तों ने किसी तरह उसे एक
पेड़ के छांव में बैठाया।
73
00:05:22,320 --> 00:05:26,160
और चाय पानी बेचने वाली एक औरत से
डॉक्टर का पता पूछा।
74
00:05:27,200 --> 00:05:31,600
जैसे ही उस औरत की नजर चारू पर
पड़ी उसके मुँह से निकला।
75
00:05:32,600 --> 00:05:38,240
अरे ई छोड़ी तो अपने पुराने महरनी
रानी सज ऐसे दिखे हैं।
76
00:05:39,560 --> 00:05:43,680
किसी ने उस औरत की बात में कोई
दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि वह
77
00:05:43,680 --> 00:05:46,080
सब चारु की हालत को लेकर परेशान
थे।
78
00:05:46,760 --> 00:05:51,920
पर इतने दर्द में भी चारु को यह
सुनकर थोड़ा कौतूहल हुआ और जैसे
79
00:05:51,920 --> 00:05:57,320
ही दर्द कम हुआ उसने उस औरत से
उसकी कही बात का मतलब पूछा जवाब
80
00:05:57,320 --> 00:06:00,720
चाहिए।
तो भंवर विलासरा पुराने किले में
81
00:06:00,720 --> 00:06:06,160
जा चारों थोड़ी सी ठीक हुई।
सब जल्दी से गाड़ी में बैठे और
82
00:06:06,160 --> 00:06:10,760
हवा महल की तरफ निकल पड़े।
चारों ने पीछे पलट कर उस औरत की
83
00:06:10,760 --> 00:06:16,000
तरफ देखा तो उसने एक रहस्यमय
मुस्कराहट के साथ अपने हाथ सिर के
84
00:06:16,000 --> 00:06:18,920
ऊपर ले जाकर।
को प्रणाम किया।
85
00:06:20,160 --> 00:06:25,440
हवा महल देखने के बाद सब ने बाजार
का रुख किया, क्योंकि शॉपिंग सब
86
00:06:25,440 --> 00:06:30,920
की लिस्ट में पहले नंबर पर थी।
शाम के 6:00 बज चूके थे और अगले
87
00:06:30,920 --> 00:06:35,280
दिन दिल्ली के लिए निकलना था।
इसलिए तय हुआ की यात्रा जयपुर तक
88
00:06:35,280 --> 00:06:39,080
ही रखी जाए।
ये सुनकर चारू का मुँह उतर गया।
89
00:06:39,680 --> 00:06:44,480
उसे तो भंवर विलास जाना था उस औरत
की कही बात पुख्ता करने के लिए
90
00:06:45,920 --> 00:06:49,280
राजस्थान आकर कोई किला महल नहीं
देखा तो क्या घूमे?
91
00:06:49,920 --> 00:06:53,240
यहाँ से एक डेढ़ घंटे की दूरी पर
भंवर विलास है।
92
00:06:53,520 --> 00:06:58,720
चलो ना वहाँ जलते हैं।
चारू के इस सुझाव पर लोग दो
93
00:06:58,720 --> 00:07:02,400
ग्रुप्स में बैठ गए।
कुछ जाना चाहते थे कुछ नहीं।
94
00:07:03,120 --> 00:07:08,520
अंततः सबको उसके जिद के आगे झुकना
पड़ा और गाड़ी भवर विलास की ओर चल
95
00:07:08,520 --> 00:07:13,240
पड़ी।
अरे चारू, मैं आप पर डायरेक्शन
96
00:07:13,240 --> 00:07:17,840
सीट करना।
किधर जाना है पता तो चले गाड़ी
97
00:07:17,840 --> 00:07:24,160
चला रहे अमर ने पूछा तो चारु पूरे
आत्मबिस्वास से बोली, आरे तू चला?
98
00:07:24,160 --> 00:07:29,800
मैं बताती हूँ कहा जाना है पहले
पांच छे किलोमीटर बिल को सीधा चल
99
00:07:30,440 --> 00:07:36,520
फिर दुर्गा मंदिर से बाय लेना।
इस तरह बिना मैप देखे चारों ने जब
100
00:07:36,520 --> 00:07:41,520
सफलता पूर्वक सबको भवर विलास
पहुंचा दिया तो दूसरों से ज्यादा
101
00:07:41,520 --> 00:07:46,400
आश्चर्य उसे खुद हुआ क्योंकि उसने
इस महल का नाम ही पहली बार सुना
102
00:07:46,400 --> 00:07:49,040
था।
फिर लोकेशन जानना तो दूर की बात
103
00:07:49,040 --> 00:07:53,400
थी वहाँ पहुँचकर महल की दयनीय
हालत देख कर।
104
00:07:53,600 --> 00:07:58,360
सबको बड़ा अफसोस हुआ।
चरवाहों और गड़रियों से घिरे उस
105
00:07:58,360 --> 00:08:04,080
छोटी सी जगह पर वह विशाल उजाड़
महल अपने गौरव हीन अतीत का परिचय
106
00:08:04,080 --> 00:08:07,640
दे रहा था।
ऊपर से स्थानीय लोग इन्हें अजीब
107
00:08:07,640 --> 00:08:10,520
नजरों से घूर रहे थे, खासकर चारू
को।
108
00:08:11,240 --> 00:08:15,600
एक बूढ़ी दादी तो राणे सा राणे सा
कहते हुए उसके पैरों पर गिर पड़ी
109
00:08:16,960 --> 00:08:19,040
ये सब।
इस तरह का अजीब बर्ताव क्यों कर
110
00:08:19,040 --> 00:08:23,960
रहे है?
सोनल बोली, हम्म ये महल भी बहुत
111
00:08:23,960 --> 00:08:28,440
पुराना लग रहा है, उजाड़ भी है,
लगता है सरकार इसकी देखरेख नहीं
112
00:08:28,440 --> 00:08:30,520
करती।
अमर बोला।
113
00:08:31,800 --> 00:08:35,240
गाइस तुम लोग आगे चलो, मैं ज़रा
बाथरूम हो कर आती।
114
00:08:35,240 --> 00:08:40,960
हूँ नहीं, चारु सब साथ चलेंगे तू
हो कर आ, हम यहीं पर हैं।
115
00:08:42,600 --> 00:08:48,840
सोनल की इस बात पर सभी एकमत हुए।
चारों को महल के आसपास कहीं
116
00:08:48,840 --> 00:08:53,040
बाथरूम नहीं मिला।
तभी उसे दूर दिवार पर एक लाल लोहे
117
00:08:53,040 --> 00:08:56,920
का दरवाजा दिखा।
बाथरूम समझकर दरवाजा खोलकर वो
118
00:08:56,920 --> 00:09:01,320
अंदर गई तो वो चौंक गई।
अंदर अट्ठारहवीं शताब्दी का माहौल
119
00:09:01,320 --> 00:09:05,600
था, कोई महफिल सजी हुई थी, गाना
बजाना चल रहा था।
120
00:09:05,960 --> 00:09:08,600
सबने राज़ परिवारों जैसे कपड़े
पहने हुए थे।
121
00:09:09,400 --> 00:09:16,040
वो डरते डरते आगे गयी और किसी से
पूछा ये क्या चल रहा है पर उस
122
00:09:16,040 --> 00:09:20,600
व्यक्ति ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने एक दो और लोगों से पूछा पर
123
00:09:20,600 --> 00:09:24,360
सब संगीत का आनंद ले रहे थे।
ऐसा लग रहा था मानो कोई उसे देख
124
00:09:24,360 --> 00:09:29,920
ही नहीं पा रहा था।
तभी उसकी नजर सिंहासन पर बैठे
125
00:09:30,200 --> 00:09:32,080
पीली पगड़ी बांधे व्यक्ति पर
पड़ी।
126
00:09:32,720 --> 00:09:36,440
पोषण के व्यवहार से वह कोई राजा
या राजकुमार लग रहा था।
127
00:09:37,160 --> 00:09:41,640
चारु को वह बहुत पहचाना सा लगा
मानो अभी हाल ही में कभी मिली थी।
128
00:09:42,480 --> 00:09:46,120
अचानक सब उठ खड़े हुए कोई आ रहा
था।
129
00:09:46,240 --> 00:09:50,680
संगीत रोक दिया गया।
उसने देखा दूर से रात सी पोशाक
130
00:09:50,680 --> 00:09:54,800
पहने और लाल रंग की पगड़ी बांधे
एक युवक चला आ रहा था।
131
00:09:55,400 --> 00:09:59,200
शक्ल सूरत में वह बिल्कुल सिंहासन
पर बैठे व्यक्ति का हमशक्ल था।
132
00:10:00,800 --> 00:10:03,960
उसे समझते देर नहीं लगी कि ये
दोनों जुड़वा थे।
133
00:10:05,000 --> 00:10:09,480
लाल पगड़ी वाला युवक चारो के
सामने से गुजरा तो उसने एक जलक
134
00:10:09,480 --> 00:10:14,040
चारू की और ताका नजरे मिलते ही
चारो का चेहरा सफ़ेद बढ़ गया।
135
00:10:14,640 --> 00:10:21,800
ये ये तो वो स्वयं थी यही आँखे तो
वो रोज़ आईने में देखती थी तो तो
136
00:10:21,800 --> 00:10:24,280
क्या मेरे इस महल से कोई पिछले
जनम का रिश्ता है?
137
00:10:25,400 --> 00:10:29,040
अभी वह ऐसा सोच ही रही थी कि वहाँ
कोलहल मच गया।
138
00:10:29,560 --> 00:10:32,960
आए हुए युवक ने पहले वाले युवक पर
आक्रमण कर दिया था।
139
00:10:33,440 --> 00:10:35,640
दोनों के बीच तलवार बाजी हो रही
थी।
140
00:10:36,080 --> 00:10:39,720
फिर देखते ही देखते लाल पगड़ी
वाले ने पीली पगड़ी वाले को मौत
141
00:10:39,720 --> 00:10:43,440
के घाट उतार दिया।
पर इस लड़ाई में वह भी आहत हुआ
142
00:10:43,440 --> 00:10:46,440
था।
उसके पेट के बाईं तरफ से खून निकल
143
00:10:46,440 --> 00:10:50,000
रहा था।
ये देख चारों के पेट में तेज दर्द
144
00:10:50,000 --> 00:10:53,120
उठा और वह किसी तरह लड़खड़ाते हुए
बाहर आई।
145
00:10:53,520 --> 00:10:57,800
बाहर आते ही उसका दर्द गायब हो
गया और साथ ही वह दरवाजा भी।
146
00:10:59,000 --> 00:11:03,320
चारों ने अभी जो सब देखा था, वह
उसके अतीत की झलक थी।
147
00:11:03,720 --> 00:11:08,080
जिसने उसे अपने जुड़वा भाई की
हत्या की थी और तलवार के घाव का
148
00:11:08,080 --> 00:11:13,600
दर्द इस जनम में भी भुगत रही थी।
घबराई और सहमी जब वह दोस्तों के
149
00:11:13,600 --> 00:11:18,400
पास गई तो पाया वे सब अचंभित होकर
एक बड़े से पोर्ट्रेट को देख रहे
150
00:11:18,400 --> 00:11:21,680
थे, जिसमे बीच में राजमाता बैठी
हुई थी।
151
00:11:21,920 --> 00:11:26,760
और दोनों तरफ से जुड़वा भाई थे।
चारू देख ये तो बिल्कुल तेरी
152
00:11:26,760 --> 00:11:31,480
हमशक्ल है।
सोनल बोली पर चारू को पता था।
153
00:11:31,720 --> 00:11:35,880
वो राजमाता की नहीं बल्कि लाल
पगड़ी वाले का पुनर्जन्म थी।
154
00:11:36,600 --> 00:11:40,000
वहाँ के स्थानीय लोगों से उन्हें
राजवंश की कहानी पता चली।
155
00:11:40,760 --> 00:11:45,400
उस वंश में हर पीढ़ी में जुड़वा
हुए थे और हर बार सिर्फ एक ही
156
00:11:45,400 --> 00:11:51,520
बचना था एक जनम में जो मारता था
अगले जनम में वो खुद मारा जाता
157
00:11:51,520 --> 00:11:58,320
था, शापित वंश था वो घर वापस
पहुंचते ही उसने अपनी माँ को पूछ
158
00:11:58,320 --> 00:12:01,800
पूछ कर पागल कर दिया।
कि कहीं उसके कोई जुड़वा भाई या
159
00:12:01,800 --> 00:12:05,640
बहन तो नहीं थे?
उसे पूरा यकीन था कि जिसे उसने
160
00:12:05,640 --> 00:12:11,280
मारा वह इस जन्म में उसको मारेगा।
दिन रात यही सब सोचकर उसे
161
00:12:11,280 --> 00:12:14,920
डिप्रेशन हो गया और उसका
स्वास्थ्य भी बिगड़ता गया।
162
00:12:15,840 --> 00:12:19,400
उसी दौरान उसके मौसा जी की हार्ट
अटैक से मृत्यु हो गई।
163
00:12:19,960 --> 00:12:25,040
मौसी हॉउस वाइफ थी और सोनल भी
एनजीओ का काम करती थी, इसलिए वह
164
00:12:25,040 --> 00:12:29,760
आर्थिक तंगी में आ गए।
1 दिन उसने अपने माता पिता को
165
00:12:29,800 --> 00:12:34,840
किसी गंभीर विषय पर आलोचना करते
हुए सुना और पूरी बात सुनकर उसके
166
00:12:34,840 --> 00:12:39,720
पैरों तले जमीन खिसक गई।
सोनल उसकी सग्गी बड़ी बहन थी।
167
00:12:40,720 --> 00:12:44,240
उसके मौसा मौसी शादी के कई साल
बाद तक बे औलाद थे।
168
00:12:44,760 --> 00:12:48,600
इसलिए चारु के जन्म लेते ही
उन्होंने सोनल को आधिकारिक रूप से
169
00:12:48,600 --> 00:12:52,240
गोद ले लिया था।
उसके माता पिता यही विवेचना कर
170
00:12:52,240 --> 00:12:57,640
रहे थे की मौसा की मृत्यु के बाद
किस तरह सोनल की मदद करे क्योंकि
171
00:12:57,640 --> 00:13:02,520
आखिर थी तो उन्हीं की संतान।
इस खुलासे से चारों के अंदर की
172
00:13:02,520 --> 00:13:06,800
सारी दुविधाएं मिट गयी और उसे
जन्मो के अभिशाप को खत्म करने का
173
00:13:06,800 --> 00:13:10,720
समाधान मिल गया।
एक हफ्ते के अंदर ही उसने पिता से
174
00:13:10,720 --> 00:13:14,240
विल बनवाई और बड़ा हिस्सा सोनल के
नाम करवाया।
175
00:13:15,040 --> 00:13:18,800
दोनों बहनों में कजिन के तौर पर
हमेशा से ही अपार स्नेह था।
176
00:13:19,640 --> 00:13:23,280
जो अब वास्तविकता जानने के बाद और
भी प्रगाढ़ हो गया था।
177
00:13:24,040 --> 00:13:28,080
आज 7 साल बाद दोनों पार्टनर्स के
रूप में न सिर्फ एनजी ओह चला रही
178
00:13:28,080 --> 00:13:33,080
थी बल्कि अपने पिता का बिज़नेस भी
सफलतापूर्वक संभाल रही थी।
179
00:13:37,000 --> 00:13:42,160
दोस्तों, ये थी चारों की आपीती
आशा करती हूँ आज की ये कहानी आप
180
00:13:42,160 --> 00:13:47,560
सबको पसंद आई होगी और ये घटना इस
सिद्धांत को बल देती है की टाइम
181
00:13:47,560 --> 00:13:52,840
इस नॉट लिनियर पर ये सब हम
मनुष्यों की समझ से परे है
182
00:13:53,160 --> 00:13:56,680
क्योंकि हमारा मस्तिष्क अभी तक उस
आयाम में पहुंचा ही नहीं।
183
00:13:57,600 --> 00:14:01,240
पर इस तरह की मैट्रिक्स में गलीच
वाली घटनाएं हमें ये सोचने पर
184
00:14:01,240 --> 00:14:05,640
मजबूर करती हैं कि हम जो देख रहे
हैं क्या वो सच है?
185
00:14:07,000 --> 00:14:10,680
मुझे यकीन है आप में से कईयों ने
ऐसे अनुभव किए हैं।
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00:14:11,080 --> 00:14:15,720
अगर आप चाहे अपनी आपबीती को शेयर
करना तो प्लीज़ हमें ईमेल करें।
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00:14:16,400 --> 00:14:18,040
लिंक डिस्क्रिप्षन में हैं।