Jan. 28, 2026

Bas Ek Kitaab Aur/ Read On

Bas Ek Kitaab Aur/ Read On

Jugal, an aspiring chartered accountant, retreats to his uncle's secluded forest lodge to prepare for his exams in solitude. Instead of peace, he encounters an unexpected and beautiful distraction—books. As the forest grows quieter and the lodge darker, Jugal finds himself increasingly addicted to the stories. But who wrote those books and why was the library always so dirty!?
Written and Narrated by: Manoshi
Warm thanks to Shantanu Paul (Hari's voice) for his collaboration on this story.

1
00:00:02,120 --> 00:00:05,520
कुछ किस्से कुछ आप बीती में आप
सबका स्वागत है।

2
00:00:06,360 --> 00:00:13,920
मैं हूँ मानुषी आपकी होस्ट और इस
स्टोरी पॉडकास्ट की वाचक दोस्तों,

3
00:00:13,920 --> 00:00:19,520
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि
ढूंढने गए कुछ शर्मीला और कुछ?

4
00:00:20,520 --> 00:00:24,440
हम में से कई इस परिस्थिति से
गुजरे हैं, जहाँ हमने तेल का ताड़

5
00:00:24,440 --> 00:00:27,840
बना दिया।
पर जब भावनाओं को किनारे कर दिमाग

6
00:00:27,840 --> 00:00:31,560
का इस्तेमाल किया तो सब शीशे की
तरह साफ हो गया।

7
00:00:32,159 --> 00:00:38,200
कुछ ऐसा ही जुगल के साथ हुआ जब वो
अपने चाचा जीके घर गया तो आइए।

8
00:00:38,640 --> 00:00:48,080
सुनते हैं आज की कहानी जिसका
शीर्षक है बस एक किताब, और तो तू

9
00:00:48,080 --> 00:00:49,920
कह रहा है।
तू सीए।

10
00:00:49,920 --> 00:00:53,320
करेगा।
मकॉम में दाखिला नहीं लेगा।

11
00:00:54,480 --> 00:00:57,280
हाँ, माँ मैंने कॉमर्स लिया ही
इसलिए।

12
00:00:57,760 --> 00:01:01,760
ताकि चार्टर्ड अकॉउंटेंट बन सकूँ।
मेरी बीकॉम में फर्स्ट डिवीज़न

13
00:01:01,760 --> 00:01:05,120
मार्क्स भी है, मुझे तो डायरेक्ट
अडमिशन मिल जाएगा?

14
00:01:06,360 --> 00:01:10,160
लेकिन बेटा इस छोटे शहर में सीए
की पढ़ाई।

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00:01:11,240 --> 00:01:16,080
तभी तो आपसे कह रहा हूँ, पापा से
बात करिए, उनके दूर के रिश्ते के

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00:01:16,080 --> 00:01:21,440
वो भाई है ना?
मनोहर चाचा वो सीए है और अहमदाबाद

17
00:01:21,440 --> 00:01:27,480
में उनका अपना फर्म भी है।
तो तू अहमदाबाद जाकर पढ़ाई करना

18
00:01:27,480 --> 00:01:33,120
चाहता है, माँ।
जब घर में ही सीए फर्म है, तो

19
00:01:33,120 --> 00:01:35,440
मुझे यहाँ वहाँ भटकने की क्या
जरूरत।

20
00:01:36,000 --> 00:01:38,040
मेरी आर्टिकलशिप वहीं से हो
जाएगी।

21
00:01:39,520 --> 00:01:44,120
सावित्री जी को ज्यादा तो कुछ समझ
में नहीं आया पर इतना अनुमान हो

22
00:01:44,120 --> 00:01:49,760
गया कि अब बेटा इस छोटे शहर से
निकलना चाहता है और जैसा कि

23
00:01:49,760 --> 00:01:53,920
अधिकतर मध्यमवर्गीय परिवारों में
होता है पिता तक अपनी बात

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00:01:53,920 --> 00:01:57,520
पहुंचाने के लिए।
बेटी को माँ का सहारा लेना पड़ता

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00:01:57,520 --> 00:02:04,080
है इसलिए इस पूरी परिस्थिति में
सावित्री जी की भूमिका मात्र एक

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00:02:04,080 --> 00:02:08,520
संदेश वहाँ की थी और जिसे
उन्होंने बखूबी निभाया।

27
00:02:08,720 --> 00:02:13,840
दोपहर 1:00 बजे के आसपास जुगल के
पिता ने मनोहर जी को फ़ोन लगाया

28
00:02:14,120 --> 00:02:18,520
और पूरी बात बताई।
मनोहर जी उनके सेकंड कजिन थे।

29
00:02:19,240 --> 00:02:23,600
दूर का रिश्ता होते हुए भी हम
उम्र होने के कारण दोनों भाई काफी

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00:02:23,600 --> 00:02:27,160
करीब थे।
1 साल पहले ही मनोहर जी की पत्नी

31
00:02:27,160 --> 00:02:31,160
का स्वर्गवास हुआ था और उनकी कोई
संतान भी नहीं थी।

32
00:02:31,560 --> 00:02:35,920
इसलिए जब उन्हें जुगल के उनके पास
जाकर सीए करने के प्रस्ताव का पता

33
00:02:35,920 --> 00:02:41,400
चला तो वे बहुत खुश हुए और जुगल
के पिता को बिना देर किये उसे

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00:02:41,400 --> 00:02:46,000
अहमदाबाद भेजने को कहा।
एक हफ्ते बाद ही अपना बोरियां

35
00:02:46,000 --> 00:02:49,280
बिस्तर लेकर जुगल चाचा के घर
पहुँच गया।

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00:02:50,800 --> 00:02:57,840
सारी सुख सुविधाओं से भरा पर
रौनकहीन बड़ा सा आलीशान घर सच ही

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00:02:57,840 --> 00:03:02,680
कहा है किसी ने घर ईंट पत्थर से
नहीं परिवार से बनता है।

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00:03:03,680 --> 00:03:08,440
जुगल के आ जाने से चाचा को भी घर
में रहने का बहाना मिल गया, वरना

39
00:03:08,440 --> 00:03:10,640
उनका पूरा समय फॉर्म में ही
गुजरता था।

40
00:03:11,840 --> 00:03:15,240
वे जुगल को अपने साथ आधे दिन के
लिए ऑफिस ले जाते।

41
00:03:15,680 --> 00:03:20,440
शाम को उसके साथ बैठकर सीए की
तैयारी की बारीकियां सिखाते और

42
00:03:20,440 --> 00:03:24,280
रात में चाचा भतीजा टीवी देखते
हुए साथी खाना खाते।

43
00:03:25,240 --> 00:03:29,760
एक तरह से मनोहर जी को जुगल में
एक पीटा मिल गया।

44
00:03:30,480 --> 00:03:34,520
आर्टिकल शिप का पहला महीना था।
इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए अभी

45
00:03:34,520 --> 00:03:37,840
बहुत समय था।
जुगल जी जान से तैयारी में लगा

46
00:03:37,840 --> 00:03:42,440
हुआ था।
1 दिन सुबह उसने चाचा को किसी से

47
00:03:42,440 --> 00:03:47,040
फ़ोन पर बात करते हुए सुना।
उनकी आवाज में गुस्सा और परेशानी

48
00:03:47,040 --> 00:03:50,920
साफ थिरक रही थी।
नाश्ते के वक्त भी मनोहर जी का

49
00:03:50,920 --> 00:03:55,920
ध्यान कहीं और ही था।
चाचा जी सब ठीक तो है ना?

50
00:03:56,720 --> 00:04:02,440
अब काफी परेशान दिख रहे हैं।
हाँ, हाँ, बेटा, सब ठीक है, तुम

51
00:04:02,440 --> 00:04:07,480
नाश्ता करो।
चाचा जी दो महीने से आपके साथ

52
00:04:07,480 --> 00:04:09,960
हूँ।
आपका चेहरा पड़ना आ गया है मुझे

53
00:04:10,640 --> 00:04:14,920
प्लीज़ बताइए ना क्या परेशानी है?
शायद मैं कुछ मदद कर सकूँ।

54
00:04:15,960 --> 00:04:18,760
जुगल के ज़ोर देने पर मनोहर जी
बोले।

55
00:04:19,720 --> 00:04:24,920
बेटा शहर के बाहर जंगल की मुहाने
पर मेरा एक छोटा सा कॉटेज है।

56
00:04:25,880 --> 00:04:30,920
हर महीने शहर की व्यस्तता से दूर,
मैं और तुम्हारी चाची थकान मिटाने

57
00:04:30,920 --> 00:04:33,560
के लिए वहाँ कुछ दिन गुज़ारा करते
थे।

58
00:04:34,800 --> 00:04:39,920
उनके निधन के बाद मेरा फिर कभी मन
नहीं हुआ वहाँ जाने का फलस्वरूप

59
00:04:39,920 --> 00:04:43,760
वो घर छह महीने तक बंद रहा किसी
की सलाह पर।

60
00:04:44,080 --> 00:04:48,720
मैंने उसे फॉरस्ट लॉज के रूप में
किराये पर देना शुरू किया पर हर

61
00:04:48,720 --> 00:04:53,520
बार अजीब वाकया रुकावट बनता रहा।
कैसा अजीब वाकया?

62
00:04:53,520 --> 00:04:57,120
चाचा जी?
जीस किसी ने भी वहाँ रात गुजारी।

63
00:04:57,720 --> 00:05:02,160
वे चीखते चिल्लाते बाहर निकले।
उन्हें वहाँ अजीब अजीब आवाज़े

64
00:05:02,160 --> 00:05:07,280
सुनाई दी।
वहाँ रहते क्या आपने कभी ऐसा

65
00:05:07,280 --> 00:05:10,200
अनुभव किया?
नहीं, कभी नहीं।

66
00:05:11,000 --> 00:05:14,840
और आज के समय में इन सब पर कौन
विश्वास करता है भला?

67
00:05:15,560 --> 00:05:20,560
मुझे तो लगता है कोई उस जगत को
हॉन्टेड दिखाकर मेरा कॉटेज हड़पना

68
00:05:20,560 --> 00:05:24,880
चाहता है।
जुगल ध्यान से चाचा जी की बातें

69
00:05:24,880 --> 00:05:30,200
सुन रहा था।
सच कहूं तो बेटा मेरी अब उस घर

70
00:05:30,200 --> 00:05:35,200
में कोई दिलचस्पी नहीं।
मैं तो उसे बेच देना चाहता हूँ और

71
00:05:35,200 --> 00:05:40,080
इसलिए मैंने एक डीलर को चाबियां
भी दे रखी है पर कल जब वो किसी को

72
00:05:40,080 --> 00:05:44,240
घर दिखाने के लिए ले गया।
तो उन सब को अंदर किसी शक्ति का

73
00:05:44,240 --> 00:05:49,640
आभास हुआ।
चाचा जी, अगर आप बुरा ना माने तो

74
00:05:49,640 --> 00:05:54,240
क्या मैं कुछ दिन वहाँ जाकर रहूँ?
जंगल के शांत माहौल में पढ़ाई भी

75
00:05:54,240 --> 00:05:57,800
हो जाएगी।
और ये सब कौन कर रहा है इसका मैं

76
00:05:57,800 --> 00:06:03,080
पता भी लगा लूँगा।
मनोहर जी को खामोश देख जुगल बोला।

77
00:06:04,000 --> 00:06:07,600
चाचाजी कहीं आप इन सब को सच तो
नहीं मान रहे?

78
00:06:08,720 --> 00:06:14,640
अरे नहीं बेटा, परालौकिक चीजों
में मेरा विश्वास नहीं, मुझे यकीन

79
00:06:14,640 --> 00:06:17,200
है इन सबके पीछे कोई अराजक तत्व
है।

80
00:06:17,880 --> 00:06:21,600
पर मुझे चिंता इस बात की है।
की वे कहीं तुम्हें कोई हानि ना

81
00:06:21,600 --> 00:06:24,440
पहुंचाए आप?
बेफिक्र रहे।

82
00:06:24,440 --> 00:06:29,120
चाचा जी मैं भी अपने कॉलेज का
पहलवान रह चूका हूँ, आप बस मेरे

83
00:06:29,120 --> 00:06:34,960
जाने की तैयारी कर दे।
ठीक है फिर कल ट्रैन का टिकट कर

84
00:06:34,960 --> 00:06:40,840
देता हूँ, 5 घंटे का सफर है।
चौकीदार हीरा शाम को आ जाता है।

85
00:06:41,440 --> 00:06:46,000
बिमला के लिए पोस्ट ऑफिस फ़ोन कर
दूंगा, वो आकर साफ सफाई, खाना

86
00:06:46,000 --> 00:06:49,480
वगैरह देख लेगी।
पोस्ट ऑफिस क्यों?

87
00:06:50,760 --> 00:06:55,760
अरे, वहाँ मोबाइल नहीं चलता वैसे
मेरे घर पर तो लैंडलाइन फ़ोन है।

88
00:06:56,160 --> 00:06:59,280
पर गांव वाले पोस्ट ऑफिस का फ़ोन
ही इस्तेमाल करते हैं।

89
00:07:00,760 --> 00:07:06,280
सब कुछ समझ बूझकर अगले दिन तड़के
सुबह उसने ट्रेन पकड़ी और 12:00

90
00:07:06,280 --> 00:07:14,000
बजे के आसपास कॉटेज पहुँच गया।
घने ऊंचे वृक्षों से घिरे।

91
00:07:14,640 --> 00:07:19,320
और चिड़ियों की चहचहट से गूंजते
उस बियाबान में स्थित वो शांत,

92
00:07:19,400 --> 00:07:24,960
गंभीर, दोमंजिला घर ना जाने क्यों
उसको एक अजीब सा सुकून दे दिया।

93
00:07:26,480 --> 00:07:33,800
अब पता चला क्यों चाचा चाची शहर
से भागकर यहाँ आते थे कितनी शांति

94
00:07:33,800 --> 00:07:38,480
है यहाँ?
तभी उसे दूर से एक औरत आती दिखी।

95
00:07:39,440 --> 00:07:40,480
शाहिद, ये बिमला।
है।

96
00:07:41,840 --> 00:07:45,600
उसका अनुमान सही था।
ताला खोल कर वे अंदर घुसे।

97
00:07:46,960 --> 00:07:51,760
घर बहुत ज्यादा गंदा नहीं था।
बिमला को झाड़ू उठाता देख उसने

98
00:07:51,760 --> 00:07:56,600
उसे पहले कुछ खाना बनाने को कहा।
बिमला बिना कुछ बोले रसोई में चली

99
00:07:56,600 --> 00:08:00,320
गई।
चुगर को वो थोड़ी अजीब लगी, शायद

100
00:08:00,320 --> 00:08:05,360
उसका यहाँ आने का मन नहीं था।
अपना सामान नीचे वाले कमरे में

101
00:08:05,360 --> 00:08:08,520
रखकर उसने सोचा घर का एक दौरा कर
लिया जाए।

102
00:08:09,920 --> 00:08:12,880
नीचे वाले फ्लोर में बैठा किचन और
दो कमरे थे।

103
00:08:13,520 --> 00:08:17,760
साधारण फर्निचर और जरूरी उपकरणों
के अलावा ज्यादा कुछ नहीं था।

104
00:08:18,520 --> 00:08:20,640
जुगल को कोने में रखा टेलीफोन
दिखा।

105
00:08:21,400 --> 00:08:25,800
उसने अपना मोबाइल चेक किया तो
पाया चाचा सही कह रहे थे, सिग्नल

106
00:08:25,800 --> 00:08:29,960
बिल्कुल नहीं था।
चाचा को पहुंचने की खबर देने के

107
00:08:29,960 --> 00:08:33,760
लिए फ़ोन का रिसीवर उठाया।
तो उसे भी डेड पाया।

108
00:08:34,720 --> 00:08:37,280
रिसीवर पटक कर वो ऊपर वाले फ्लोर
पर गया।

109
00:08:38,000 --> 00:08:42,760
वहाँ सिर्फ एक ही कमरा था आश्चर्य
बाहर से।

110
00:08:42,760 --> 00:08:45,520
देखने पर मुझे ऐसा क्यों लगा यहाँ
दो कमरे?

111
00:08:45,520 --> 00:08:51,320
हैं।
तभी विमला की आवाज़ आई भईया खाना

112
00:08:51,320 --> 00:08:56,200
तैयार है।
जब तक वो नीचे उतरा, बिमला सफाई

113
00:08:56,200 --> 00:09:01,000
खत्म कर चुकी थी।
ऊपर वाला कमरा किसी तरह साफ कर वो

114
00:09:01,000 --> 00:09:05,280
ये बोलते हुए निकल गई कि रात का
खाना बना दिया है और अब वो सुबह

115
00:09:05,280 --> 00:09:08,800
ही आएगी।
बिमला की जल्दबाजी देख जुगल को

116
00:09:08,800 --> 00:09:12,440
हँसी आ गई।
लगता है इसे भी ये घर भूतहा लगता

117
00:09:12,440 --> 00:09:16,040
है।
खाना खाते ही उस पर नींद हावी

118
00:09:16,040 --> 00:09:20,120
होने लगी।
हीरा तो शाम को ही आएगा, मैं

119
00:09:20,120 --> 00:09:24,560
थोड़ा सो लेता हूँ।
ये सोचकर वो नीचे वाले एक बैडरूम

120
00:09:24,560 --> 00:09:29,040
में जाकर बिस्तर पर फैल गया।
काफी देर बाद उसकी आंख खुली।

121
00:09:29,480 --> 00:09:34,800
तो देखा अंदर बाहर घोर अंधेरा था,
अंगड़ाई लेते हुए उठा और ड्रॉइंग

122
00:09:34,800 --> 00:09:38,360
रूम की बत्ती जलाई।
उजाला होते ही वो चौंक उठा।

123
00:09:38,880 --> 00:09:42,320
सोफे पर 5560 उम्र का एक व्यक्ति
बैठा हुआ था।

124
00:09:43,720 --> 00:09:45,920
हीरो।
अंदर कैसे आए?

125
00:09:46,600 --> 00:09:53,760
चाबी थी क्या तुम्हारे पास?
हाँ बाबू, सारी चाबियां हैं मेरे

126
00:09:53,760 --> 00:10:03,120
पास हीरा नहीं बाबू हरी।
चाचाजी ने तो शायद हीरा बताया था,

127
00:10:03,680 --> 00:10:06,480
चलो हरी ही सही।
बाबू?

128
00:10:07,080 --> 00:10:13,760
आपने ऊपर वाली मंजिल देखी।
देखने के लिए है क्या एक ही कमरा

129
00:10:13,760 --> 00:10:18,200
तो है।
जुगल के ये बोलते ही हरी हँसते

130
00:10:18,200 --> 00:10:22,640
हुए उठ खड़ा हुआ और सीढ़ियों से
ऊपर चढ़ते हुए उसे साथ आने को।

131
00:10:22,640 --> 00:10:29,040
कहा, आइए आइए।
जुगल झुंझला कर उसके पीछे चला।

132
00:10:30,480 --> 00:10:35,880
ऊपर जाकर हरि ने दाईं ओर इशारा
किया चुगल विस्मित हो गया।

133
00:10:36,320 --> 00:10:43,320
ये कमरा तो नहीं था पहले।
मुझे पता था आपको नहीं दिखी।

134
00:10:44,800 --> 00:10:47,440
ये कहते हुए वह जुगल को अंदर ले
गया।

135
00:10:48,360 --> 00:10:51,480
कमरे में घुसते ही जुगल की आंखें
फटी की फटी रह गई।

136
00:10:52,240 --> 00:10:55,000
वह कमरा नहीं एक अच्छी खासी
लाइब्रेरी थी।

137
00:10:55,600 --> 00:11:01,200
हर दीवार पर किताबों से भरी
अलमारिया किताबें पढ़ने का शौक

138
00:11:01,200 --> 00:11:04,920
उसे हमेशा से ही था।
पर कोर्स की पढ़ाई से समय ही नहीं

139
00:11:04,920 --> 00:11:10,360
मिलता था।
ये सब मेरे मालिक की हैं।

140
00:11:11,840 --> 00:11:15,160
चतुर्जी को पढ़ने का इतना शौक है
ये मुझे मालूम नहीं।

141
00:11:15,160 --> 00:11:18,560
था।
ये कहते हुए जुगल ने एक किताब

142
00:11:18,560 --> 00:11:26,160
निकाली और वहीं बैठकर पढ़ने लगा।
बाबू ये कमरा बहुत गंदा हो गया

143
00:11:26,160 --> 00:11:33,120
है, इसकी सफाई कर दूँ क्या?
कल बिमला से करवा लूँगा हरी तुम

144
00:11:33,120 --> 00:11:40,960
जाओ मुझे ये किताब पढ़ने दो।
सुबह दरवाजे पर दस्तक से उसकी

145
00:11:40,960 --> 00:11:44,000
आँखें खुलीं।
तो खुद को अपने बिस्तर पर पाया।

146
00:11:44,560 --> 00:11:49,680
किताब अभी भी उसके हाथ में थी।
ऊपर वाले कमरे से अपने बैडरूम तक

147
00:11:49,680 --> 00:11:56,960
कब कैसे आया, उसे कुछ याद नहीं।
दरवाजा खोलकर देखा, बिमला थी, हरी

148
00:11:56,960 --> 00:12:02,000
जा चुका था चाय नाश्ता बनाकर
बिमला ने झाड़ू उठाया।

149
00:12:02,040 --> 00:12:05,680
तो जुगल ने ऊपर वाला कमरा अच्छे
से साफ करने की हिदायत दी।

150
00:12:06,320 --> 00:12:09,360
फिर अपने कमरे में जाकर किताब
लेकर मग्न हो गया।

151
00:12:10,200 --> 00:12:15,520
बिमला को गए काफी देर हो गई थी,
श्याम भी घिर आई थी पर जुगल ना तो

152
00:12:15,520 --> 00:12:19,400
नहाया धोया था और ना ही उसने खाना
खाया था।

153
00:12:19,440 --> 00:12:24,080
हाथ वाली किताब खत्म करके जब वह
दूसरी किताब लेने ऊपर गया तो देखा

154
00:12:24,080 --> 00:12:29,240
कमरा ज्यों का धूँ गंदा पड़ा था।
जो शहर की हो।

155
00:12:29,280 --> 00:12:35,640
या गांव की सबका एक ही होल है, ये
बुदबुदाता हुआ वो स्वयं ही झाड़ू

156
00:12:35,640 --> 00:12:40,720
लेकर कमरा साफ करने लगा।
तभी उसने देखा दरवाजे पर हरीखड़ा

157
00:12:40,720 --> 00:12:48,080
मुस्कुरा रहा है।
अब पता चला आप क्यों मालिक को

158
00:12:48,080 --> 00:12:52,480
इतना पसंद आए?
अरे, ये बिमला बड़ी कामचोर है, ना

159
00:12:52,480 --> 00:12:55,320
अच्छा खाना बनाती है और ना सफाई
करती है।

160
00:12:56,360 --> 00:13:01,320
अरे बाबू?
छोड़िए सफाई ये लीजिए किताबें

161
00:13:01,840 --> 00:13:07,000
पहले इन्हें पढ़िए।
हरी के हाथ में किताबें देखकर

162
00:13:07,440 --> 00:13:12,760
जुगल बच्चों की भांति चहक उठा।
किताबों से उसे लगाव तो था पर

163
00:13:12,760 --> 00:13:16,280
किताबों की ऐसी अजीब लत पहले कभी
नहीं थी।

164
00:13:17,200 --> 00:13:21,440
ऐसा लग रहा था मानो कोई अनजान
शक्ति उसके दिमाग पर काबू कर रही

165
00:13:21,440 --> 00:13:25,040
हो।
हरि के हाथ से किताबें लेकर वह

166
00:13:25,040 --> 00:13:30,400
नीचे आया और सोफे पर पसर गया।
अचानक उसे कुछ याद आया।

167
00:13:31,240 --> 00:13:36,400
और हरी चतुजी को खबर देनी थी।
उन्हें तो।

168
00:13:36,640 --> 00:13:44,200
कल ही पता चल गया था आप चिंता मत
करिए, बस किताबें पढ़िए।

169
00:13:45,240 --> 00:13:49,200
यह सुनकर आश्वस्त हुआ जुगल दोबारा
किताब में डूब गया।

170
00:13:50,200 --> 00:13:52,640
दिन से रात और रात से सुबह होती
रही।

171
00:13:53,600 --> 00:13:56,320
कब हफ्ता निकल गया?
जुगल को पता ही नहीं चला।

172
00:13:57,240 --> 00:14:01,080
ना उसे खाने पीने का होश था और ना
ही किसी और चीज़ का।

173
00:14:02,160 --> 00:14:06,400
मीठे से चिपकी चींटी की तरह दिन
रात किताब से चिपका रहता था।

174
00:14:07,320 --> 00:14:09,760
विमला को भी उसने डांट कर भगा
दिया था।

175
00:14:10,120 --> 00:14:13,240
अब सिर्फ वो था, किताबें थी और था
हरी।

176
00:14:14,440 --> 00:14:17,880
उधर शहर में मनोहर जी का चिंता के
मारे बुरा हाल था।

177
00:14:18,560 --> 00:14:21,560
इतने दिन हो गए थे पर जुगल की कोई
खबर नहीं थी।

178
00:14:22,360 --> 00:14:27,640
ना तो घर का फ़ोन लग रहा था और ना
पोस्ट ऑफिस का मजबूर होकर।

179
00:14:27,640 --> 00:14:31,320
रविवार सुबह उन्होंने ट्रेन पकड़ी
और पहुँच गए अपने कॉटेज।

180
00:14:33,760 --> 00:14:35,560
जुगल।
जुगल बेटा।

181
00:14:37,560 --> 00:14:43,760
अरे चाचा जी आप अचानक कैसे?
जुगल की अस्त व्यस्त हालत देख

182
00:14:44,360 --> 00:14:48,600
मनोहर जी चौंक उठे।
बेटा क्या हुआ तुम्हे?

183
00:14:49,000 --> 00:14:52,120
ये कैसी हालत बना रखी है?
तबियत तो ठीक है ना?

184
00:14:52,760 --> 00:14:55,880
अरे, चाचा जी?
आप अंदर आइए, मैं बिल्कुल ठीक

185
00:14:55,880 --> 00:14:59,720
हूँ।
अंदर की हालत देख कर मनोहर जी और

186
00:14:59,720 --> 00:15:03,480
अधिक परेशान हो जाते हैं।
बिमला नहीं आ रही है क्या?

187
00:15:03,760 --> 00:15:08,840
घर की ऐसी हालत क्यों है?
अरे वो आपकी बिमला एक नंबर की

188
00:15:08,840 --> 00:15:11,240
कमजोर है?
मैंने भगा दिया उसे।

189
00:15:11,840 --> 00:15:14,080
आप पहले मुझे ये बताइए आपने इस घर
की?

190
00:15:14,080 --> 00:15:21,240
इतनी बड़ी बात मुझसे छुपाई क्यों?
कौन सी बात बेटा, कहीं कहीं

191
00:15:21,240 --> 00:15:23,440
तुम्हें भी तो यहाँ ऐसा कुछ अनुभव
नहीं हुआ?

192
00:15:24,160 --> 00:15:28,120
अरे अरे नहीं, चाचा जी या भूत वूत
कुछ नहीं है।

193
00:15:28,960 --> 00:15:34,360
आइये आप मेरे साथ ज़रा ऊपर चलिए।
ये कहकर वह मनोहर जी को ऊपर वाले

194
00:15:34,360 --> 00:15:37,760
मंजिल में ले गया।
फिर दाईं ओर वाले कमरे में जाकर

195
00:15:37,760 --> 00:15:40,480
बोला।
इस खजाने के बारे में क्यों नहीं

196
00:15:40,480 --> 00:15:44,440
बताया?
मनोहर जी आश्चर्य से उसकी ओर

197
00:15:44,440 --> 00:15:48,080
देखते हुए बोले।
कौन सा खजाना?

198
00:15:48,080 --> 00:15:53,080
बेटा क्या बोल रहे हो?
जुगल ने किताबों की अलमारी की ओर

199
00:15:53,080 --> 00:15:57,600
इशारा किया।
ये ज्ञान का खजाना किताबों से भरी

200
00:15:57,600 --> 00:16:02,200
अलमारिया मैं तो इसी कमरे में कैद
हो कर रह गया हूँ चाचाजी अच्छा

201
00:16:02,200 --> 00:16:07,240
हुआ हरी का जो उसने मुझे एक कमरा
दिखाया वो आपका वफादार सेवक है।

202
00:16:07,320 --> 00:16:10,800
रोज़ आकर पहले मुझे यहाँ से एक
किताब निकाल कर देता है।

203
00:16:12,240 --> 00:16:17,480
मनोहर जी हतपर्व होकर जुगल को देख
रहे थे, जो बाल्कनी में शून्य में

204
00:16:17,480 --> 00:16:24,040
हाथ पांव चला रहा था।
बेटा कैसी किताबें कौनसी अलमारिया

205
00:16:24,400 --> 00:16:28,640
तुम किस कमरे की बात कर रहे हो?
हम इस वक्त बाल्कनी में खड़े हैं।

206
00:16:29,280 --> 00:16:36,000
पोदी को सामने खुला आसमान पोदा
जंगल ऊपर वाली मंजिल पर सिर्फ एक

207
00:16:36,000 --> 00:16:42,120
ही कमरा है वो वाला।
नहीं नहीं चाचा जी ये देखिए

208
00:16:42,120 --> 00:16:46,600
किताबें कितनी किताबें?
ये कहकर वो पागलों की तरह हँसने

209
00:16:46,600 --> 00:16:50,280
लगा।
मनोहर जी ने उसे पकड़कर ज़ोर से

210
00:16:50,280 --> 00:16:58,320
जोड़ा।
चाचा के चिल्लाने और झगझोरने पर

211
00:16:58,320 --> 00:17:03,280
जुगल मानो गहरी नींद से जागा।
उसकी आँखों के आगे से एक पर्दा हट

212
00:17:03,280 --> 00:17:06,400
गया।
और उसने पाया वो सही में बाल्कनी

213
00:17:06,400 --> 00:17:13,160
में खड़ा था तो वो वो हरी आपका
चौकीदार।

214
00:17:15,280 --> 00:17:19,680
तुम जीस दिन यहाँ पहुंचे, उसके
अगले ही दिन मुझे हीरा का तार

215
00:17:19,680 --> 00:17:23,800
मिला, उसकी माँ बीमार थी इसलिए वो
छुट्टी लेकर गांव चला गया।

216
00:17:24,520 --> 00:17:28,800
और मैंने उसकी जगह किसी और को
भेजा भी नहीं लगता है कोई चोर उचक

217
00:17:28,800 --> 00:17:31,080
का यहाँ आकर तुम्हें बेवकूफ बना
रहा है?

218
00:17:32,520 --> 00:17:37,680
चाचा जी, उसके आने का समय हो गया
है, आप कहीं छुप जाइए, हम उसे

219
00:17:37,680 --> 00:17:42,480
रंगे हाथ पकड़ेंगे।
मनोहर जी को उपाय सही लगा।

220
00:17:43,480 --> 00:17:48,560
प्रतीक्षा करते करते शाम ढल कर
रात होने को आई पर कोई नहीं आया।

221
00:17:49,840 --> 00:17:55,840
चुगल का चेहरा देख मनोहर जी बोले।
कोई बात नहीं बेटा आज नहीं तो कल

222
00:17:55,840 --> 00:18:00,520
पकड़ा जाएगा।
इतने दिनों में आज पहली बार जुगल

223
00:18:00,520 --> 00:18:03,080
का ध्यान ऊपर वाले असली कमरे पर
गया।

224
00:18:03,760 --> 00:18:08,760
जो हमेशा बंद ही रहता था।
चाचा जी, उस कमरे में क्या है?

225
00:18:10,560 --> 00:18:13,200
क्या तुम कभी उस कमरे में नहीं गए
बेटा?

226
00:18:14,560 --> 00:18:17,080
ये कहकर उन्होंने कमरे का दरवाजा
खोला।

227
00:18:17,840 --> 00:18:20,520
कमरा साफ सुथरा और करीने से सजा
था।

228
00:18:22,080 --> 00:18:24,840
ये घर।
असल में तुम्हारी चाची के सबसे

229
00:18:24,840 --> 00:18:30,080
बड़े भाई साहब का था।
उनकी आकस्मिक मृत्यु के बाद चाची

230
00:18:30,080 --> 00:18:34,240
को वसीयत में मिला था।
इस कमरे में उनकी सारी चीजें और

231
00:18:34,240 --> 00:18:40,040
यादें चाची ने समेट कर रखी थी।
यह कहते हुए मनोहर जी ने एक

232
00:18:40,040 --> 00:18:43,720
पुराना बक्सा खोला।
और उसमें से कुछ मेनस्क्रिप्ट

233
00:18:43,760 --> 00:18:48,440
निकाली।
उन्हें लिखने का शौक था, काफी

234
00:18:48,440 --> 00:18:51,960
अच्छा लिखते थे पर कभी कुछ
प्रकाशित नहीं कर पाए।

235
00:18:52,800 --> 00:18:59,880
ये देखो उनकी मेनस्क्रिप्ट।
ये ये तो वही किताबें हैं जीस,

236
00:18:59,880 --> 00:19:04,960
चौकीदार ने मुझे दी थी।
तभी मनोहर जी ने बक्से में से कुछ

237
00:19:04,960 --> 00:19:10,120
तस्वीरें निकाली।
जुगल जुगल ये देखो ये थे बड़े भाई

238
00:19:10,120 --> 00:19:14,320
साहब।
मनोहर जी की ये बात सुनकर चुगल

239
00:19:14,320 --> 00:19:18,360
डरते हुए पीछे मुड़ा।
उसे यकीन था फोटो में वही आदमी

240
00:19:18,360 --> 00:19:24,960
होगा जिसे वह चौकीदार समझ रहा था।
पर ये क्या फोटो तो ऐनेक पहने

241
00:19:24,960 --> 00:19:27,200
किसी रॉबली चेहरे वाले शख्स की
थी।

242
00:19:28,120 --> 00:19:32,560
जुगल चैन की सांस लेने ही वाला था
की उसे चाचा के हाथ में एक और

243
00:19:32,560 --> 00:19:34,760
तस्वीर दिखी।
चाचा जी।

244
00:19:35,120 --> 00:19:38,320
वो वो।
आदमी आपके भाई साहब के साथ वही

245
00:19:38,320 --> 00:19:43,200
आता था यहाँ रोज़ शाम को।
यह कैसे हो सकता है?

246
00:19:43,720 --> 00:19:49,600
ये भाईसाहब का विश्वस्त नौकर था।
उनके देहांत के कुछ दिन बाद इसकी

247
00:19:49,600 --> 00:19:51,840
उस बाल्कनी से गिरकर मृत्यु हो गई
थी।

248
00:19:52,600 --> 00:19:57,920
लोग कहते हैं इसने आत्महत्या की
थी, पता नहीं सच किया था पर इसका

249
00:19:57,920 --> 00:20:05,480
नाम हीरा नहीं।
हरि था चतुजी हो सके तो आप ये

250
00:20:05,480 --> 00:20:07,200
मेनुसक्रिप्ट प्रकाशित करवा।
दें।

251
00:20:07,680 --> 00:20:10,280
कहानियों बहुत अच्छी।
हैं, मैंने पढ़ी हैं।

252
00:20:12,160 --> 00:20:16,840
जुगल के ये कहते ही ज़ोर से हवा
चलने लगी और उसे बाल्कनी पर हरी

253
00:20:16,840 --> 00:20:20,320
दिखा।
हरी ने धीरे से मुस्करा कर अपने

254
00:20:20,320 --> 00:20:24,720
हाथ जोड़े।
जुगल की बात सुनकर मनोहर जी बोले।

255
00:20:25,360 --> 00:20:28,760
हाँ, इतना तो मैं कर ही सकता हूँ
भाई साहब के लिए।

256
00:20:30,320 --> 00:20:34,000
कुछ सोचते हुए जुगल आगे बोला चाचा
जी?

257
00:20:34,800 --> 00:20:36,720
अब इस कॉटेज को बेचने की।
जरूरत नहीं।

258
00:20:37,280 --> 00:20:40,240
इसे आप।
वेकेशन होम बना दीजिए जो भी जंगल।

259
00:20:40,240 --> 00:20:42,920
घूमने आएगा वो इसे किराये पर ले
सकता है।

260
00:20:43,520 --> 00:20:47,000
आप चिंता मत कीजिए, मैं फॉरस्ट
अथॉरिटीज से बात कर लूँगा।

261
00:20:48,200 --> 00:20:51,520
पर बेटा अगर फिर किसी ने तंग किया
तो?

262
00:20:52,600 --> 00:20:57,000
अब कोई तंग नहीं करेगा चाचा जी।
आपके भूत की आखिरी ख्वाहिश पूरी

263
00:20:57,000 --> 00:21:00,760
हो गई है।
ये कहते हुए जुगल ने बाल्कनी की

264
00:21:00,760 --> 00:21:05,680
ओर देखा जहाँ हाथ जोड़े और
मुस्कुराते हुए हरी धीरे धीरे

265
00:21:05,680 --> 00:21:12,040
विलीन हो रहा था।
आशा करती हूँ आज की ये कहानी आप

266
00:21:12,040 --> 00:21:16,360
सबको पसंद आई होगी क्नॉइस।
तो क्या लगता है आपको ये किस्सा

267
00:21:16,360 --> 00:21:20,720
था या आपबीती?
मुझे इंतजार रहेगा आप सब के

268
00:21:20,720 --> 00:21:24,360
कॉमेंट्स और फीड्बैक का आप मुझे
मेल भी कर सकते है।

269
00:21:24,920 --> 00:21:26,560
लिंक डिस्क्रिप्षन बॉक्स में है।